खुद को कर इतना सशक्त तुम,
की तूफान में होकर भी तुझे समंदर से प्यार हो,
सैलाब में होते हुए भी तुझे दरिया पर नाज हो,
भींग कर भी तुम्हे बस बारिश का इंतज़ार हो।
और सोच बस इतना के,
क्या हुआ जो तू तूफान को न रोक सका,
फक्र कर के वोह तुम्हे भी तो रोक न पाया।
क्या हुआ जो तू सैलाब में बह गया,
आखिर किनारे पर तो तुम्हे उसी ने है पहुँचाया।
क्या हुआ जो तू बारिश के बूंदों में नहा गया,
खाने और पीने की तालीम तो तुझे उसी ने है दिया।
राजीव
की तूफान में होकर भी तुझे समंदर से प्यार हो,
सैलाब में होते हुए भी तुझे दरिया पर नाज हो,
भींग कर भी तुम्हे बस बारिश का इंतज़ार हो।
और सोच बस इतना के,
क्या हुआ जो तू तूफान को न रोक सका,
फक्र कर के वोह तुम्हे भी तो रोक न पाया।
क्या हुआ जो तू सैलाब में बह गया,
आखिर किनारे पर तो तुम्हे उसी ने है पहुँचाया।
क्या हुआ जो तू बारिश के बूंदों में नहा गया,
खाने और पीने की तालीम तो तुझे उसी ने है दिया।
राजीव
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