ख़त्म हुई चलो एक और कहानी,
अब ना ही कोई ग़म न कोई शिकवा,
आओ मिलकर लिखे अब ऐसा फ़साना,
जिसमे बस शुकून इसका के हम,
खुश हो बस आज में और आज हो मुस्तक्बिल,
आज से सिर्फ आज हो और कल हो फिर आज,
मजा देखो फिर जीने का और साथ में होने का!
अब ना ही कोई ग़म न कोई शिकवा,
आओ मिलकर लिखे अब ऐसा फ़साना,
जिसमे बस शुकून इसका के हम,
खुश हो बस आज में और आज हो मुस्तक्बिल,
आज से सिर्फ आज हो और कल हो फिर आज,
मजा देखो फिर जीने का और साथ में होने का!